A father has a lot to do..i cant know it all..but i have always tried...to put myself in my fathers shoes..nt to be a son..but to be a good daughter
Wat does a father think..want..when his daughter says him she loves someone..? Why does his instinct deny the proposal? I dont know..but i have tried hard to know it..thru this poem..
बेटा दर लगता है...........
तू भूख से रोती थी तो, सुन न पाता था,
उन नादान आसुओं से भी, जी घबराता था ।
तुझे झूले पर अकेला, छोड़ न पाता था,
गिर गयी तो क्या होगा, सहम जाता था।
तेरे school तेरे teacher, कई बार बैठकर चुना था,
छोटी से तेरी बातें, चुपके चुपके सुना था।
तेरी पहली सहेली को पाता है, खुद मैंने भी परखा था,
भरोसा था बेटा तुझपर, बस तेरी दुनिया से डरता था।
भरोसा देखले आज भी, कम नहीं हुआ है,
पर बेटा तू भी देख जरा, ये सवाल कितना बड़ा है।
तेरा भरोसा उस नए लड़के पर, सरान्खों पर, पर बेटा वो लड़का है
लड़का था मैं भी कभी, इसलिए दिल मेरा डरता है।
तेरा कहना सब अच्छे है वहां, बेटा अभी सब अच्छा लगता है
समझ इसे की बस एक बार, बेटी का कन्यादान होता है।
तू रोई आज तक मेरी ऊँगली पकड़कर, कभी सीने में मेरे सर छुपाया,
बेटा विदाई तक है कन्धा मेरा, फिर तो मैं भी तेरा हुआ पराया।
नहीं डरता दुनिया से रे, बस तेरी ख़ुशी को तरसता हूँ
आज बहुत रुला रहा तुझे, विदाई के बाद के आसुओं से डरता हूँ।
शायद मैं नहीं समझ रहा, शायद समझा नहीं पा रहा,
माफ़ करना बेटा मुझे, तेरा पापा तुझे रुला रहा॥
20/04/2008